जाने खुद से ही क्यों भाग रहा हु मै
जाने खुद से ही क्यों भाग रहा हु मै ढूंढ रहा था जो बरसो से, निकट ही है वो जाने कही एक एहसास मात्र है जो , जैसे चिपके ही खड़ा हो पीछे कही चाहा है पुरे दिल से जिससे, बस हाथ बढ़ा के पा लेना है अब उससे फिर भी न जाने क्यों, मस्ती…

